झुमरी तिलैया
झुमरी तिलैया कोडरमा अनुमंडल का एक प्रसिद्ध नगर है, जिसकी पहचान इतिहास, खनन और रेडियो के स्वर्णिम दौर से जुड़ी एक अनूठी कहानी के रूप में होती है। ‘झुमरी’ इस क्षेत्र के मूल गाँव का नाम था, जो वर्तमान नगर का हिस्सा बन चुका है। वहीं ‘तिलैया’ हिंदी शब्द है, जिसका अर्थ छोटे तालाब या झील से है। कभी झुमरी तिलैया अभ्रक (माइका) खनन का एक महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। 1890 के दशक में अंग्रेजों द्वारा कोडरमा से होकर रेलवे लाइन बिछाए जाने के दौरान इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अभ्रक के भंडार का पता चला। इसके बाद यहाँ खनन गतिविधियाँ तेजी से विकसित हुईं और अनेक खनन प्रतिष्ठानों की स्थापना हुई। धीरे-धीरे यह क्षेत्र अभ्रक व्यापार और खनन के लिए देशभर में जाना जाने लगा। हालाँकि झुमरी तिलैया कभी एक अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध कस्बा था, लेकिन 1950 के दशक में रेडियो के माध्यम से इसकी पहचान पूरे देश में फैल गई। उस दौर में रेडियो मनोरंजन का प्रमुख माध्यम था और रेडियो सीलोन तथा आकाशवाणी के विविध भारती जैसे कार्यक्रमों में फिल्मी गीतों की फरमाइश का विशेष आकर्षण था। इन कार्यक्रमों में झुमरी तिलैया से बड़ी संख्या में गीतों की फरमाइश भेजी जाने लगी, जिसके कारण इस छोटे से शहर का नाम देशभर के रेडियो श्रोताओं तक पहुँच गया। इस अनोखी परंपरा की शुरुआत 1950 के दशक के प्रारंभ में अभ्रक व्यवसायी रमेश्वर प्रसाद बरनवाल द्वारा की गई बताई जाती है। वे प्रतिदिन रेडियो सीलोन को लगभग 20–25 गीतों की फरमाइश भेजते थे। रेडियो पर बार-बार अपना नाम सुनकर प्रेरित होकर पान दुकानदार गंगा प्रसाद मगधिया और इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार नंदलाल सिन्हा ने भी गीतों की फरमाइश भेजना शुरू किया। धीरे-धीरे इन तीनों की लोकप्रियता ने पूरे शहर को इस परंपरा से जोड़ दिया। झुमरी तिलैया के युवा श्रोता आपस में प्रतिस्पर्धा करते थे कि कौन एक दिन या एक महीने में सबसे अधिक गीतों की फरमाइश भेज सकता है। इस प्रकार रेडियो की दुनिया में ‘झुमरी तिलैया’ एक जाना–पहचाना नाम बन गया। बाद में टेलीविजन की लोकप्रियता बढ़ने के साथ यह परंपरा धीरे-धीरे कम होती गई, लेकिन रेडियो के उस स्वर्णिम युग ने झुमरी तिलैया को एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान प्रदान की। झुमरी तिलैया की यह लोकप्रियता हिंदी सिनेमा और गीतों में भी दिखाई देती है। विभिन्न फिल्मों और गीतों में इस शहर का उल्लेख मिलता है। वर्ष 1975 की फिल्म ‘मौसमी’ में “मैं तो झुमरी तिलैया से आई हूँ” शीर्षक गीत के माध्यम से भी इस शहर का उल्लेख किया गया था। आज झुमरी तिलैया अपनी ऐतिहासिक अभ्रक खनन विरासत, रेडियो संस्कृति और विशिष्ट लोक–स्मृति के कारण कोडरमा की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फोटो गैलरी
कैसे पहुंचें
एयर द्वारा
निकटतम घरेलू हवाई अड्डा लोकनायक जयप्रकाश हवाई अड्डा, पटना है, जो कोडरमा से लगभग 165 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दूसरा निकटतम घरेलू हवाई अड्डा बिरसा मुंडा हवाई अड्डा, रांची है, जो कोडरमा से लगभग 178 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
ट्रेन द्वारा
कोडरमा रेलवे स्टेशन निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यह पटना, रांची, जम्मू, अहमदाबाद, नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, भुवनेश्वर आदि प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।