जिला कोषागार, कोडरमा जिले में सरकारी वित्तीय लेन-देन के प्रबंधन एवं नियंत्रण के लिए उत्तरदायी एक प्रमुख वित्तीय कार्यालय है। यह समाहरणालय भवन, कोडरमा के भूतल स्थित कक्ष संख्या-06 में संचालित है।
जिला कोषागार, कोडरमा
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सरकारी निधियों की प्राप्ति एवं भुगतान:
- आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDOs) द्वारा प्रस्तुत विपत्रों के भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
- कर, जुर्माना एवं शुल्क सहित सरकारी राजस्व की प्राप्ति की जाती है।
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लेखाओं का रख-रखाव:
- प्राप्तियों, व्यय, जमा एवं अग्रिम का विस्तृत लेखा-जोखा रखा जाता है।
- मासिक लेखा तैयार कर महालेखाकार (AG), झारखंड को प्रस्तुत किया जाता है।
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पेंशन सेवाएँ:
- सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ एवं पेंशन के भुगतान की प्रक्रिया एवं वितरण किया जाता है।
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GPF एवं CPS का प्रबंधन:
- सामान्य भविष्य निधि (GPF) एवं अंशदायी पेंशन योजना (CPS) से संबंधित लेन-देन का कार्य किया जाता है।
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चालान सत्यापन एवं धनवापसी:
- कोषागार चालानों का सत्यापन किया जाता है तथा लागू होने की स्थिति में धनवापसी (Refund) की प्रक्रिया की जाती है।
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स्टाम्प एवं प्रतिभूति संबंधी लेन-देन:
- गैर-न्यायिक स्टाम्प, न्यायालय शुल्क स्टाम्प एवं अन्य प्रतिभूतियों के निर्गमन तथा उनके लेखांकन का प्रबंधन किया जाता है।
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लेखा परीक्षा एवं अनुपालन:
- वित्तीय नियमों, लेखा परीक्षाओं एवं वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाता है।
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बजट नियंत्रण:
- बजट आवंटन की निगरानी की जाती है तथा स्वीकृत राशि के विरुद्ध व्यय को नियंत्रित किया जाता है।
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कर्मचारियों के वेतन एवं मजदूरी:
- वेतन विपत्रों, अवकाश नकदीकरण एवं कर्मचारियों को देय अन्य लाभों के भुगतान की प्रक्रिया में सहयोग किया जाता है।
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परीक्षाओं के आयोजन में भूमिका:
- JPSC, JSSC एवं JAC द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है।
| क्र. सं. | नाम | पदनाम |
| 1 | श्री नजमुल लैल | कोषागार पदाधिकारी |
| 2 | श्री चंद्रचूड़ मिश्रा | लेखापाल |
| 3 | श्री यश प्रकाश | लेखा सहायक |
| 4 | मो. सुहेल अख्तर | लेखा सहायक |
| 5 | श्री विकास नारायण खन्ना | कंप्यूटर ऑपरेटर |
| 6 | श्री बिनोद साव | चपरासी |
- IFMS (एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली) का 100% कार्यान्वयन:
ऑनलाइन विपत्र प्रसंस्करण, ई-भुगतान एवं रियल-टाइम लेखांकन का सुचारू रूप से क्रियान्वयन।
- महालेखाकार कार्यालय को मासिक लेखा का समय पर प्रस्तुतिकरण:
कोषागार के मासिक लेखा-विवरण को निर्धारित समय-सीमा के भीतर नियमित एवं त्रुटिरहित रूप से प्रस्तुत करना।
- पेंशन अभिलेखों का डिजिटलीकरण:
पेंशन अभिलेखों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण तथा न्यूनतम शिकायतों के साथ बैंकों द्वारा पेंशन का ऑनलाइन भुगतान सुनिश्चित करना।
- विपत्र प्रसंस्करण में शून्य लंबितता:
आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDOs) से प्राप्त सभी विपत्रों का उसी दिन अथवा अगले कार्यदिवस तक निपटारा सुनिश्चित करना।
- कोषागार निरीक्षण एवं लेखा परीक्षा का सफल आयोजन:
न्यूनतम अथवा बिना किसी प्रतिकूल टिप्पणी के स्वच्छ लेखा परीक्षा प्रतिवेदन सुनिश्चित करना।
- क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण:
कोषागार कर्मियों एवं आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDOs) के लिए वित्तीय नियमों, ई-टूल्स एवं वित्तीय सुधारों से संबंधित नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करना।
- अवसंरचना का आधुनिकीकरण:
बेहतर कार्यस्थल, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अवसंरचना एवं जनसेवा काउंटरों के साथ कोषागार कार्यालय का उन्नयन।
- त्रुटिरहित अभिलेख संधारण:
कैश बुक, लेजर एवं अन्य पंजियों का सुव्यवस्थित, अद्यतन एवं लेखा-परीक्षित रूप में संधारण सुनिश्चित करना।