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पर्यटन

कोडरमा पर्यटन

कोडरमा जिला जिसे माइका की राजधानी भी कहा जाता है जो की 1994 में उत्तरी छोटानागपुर प्रमण्डल के पुराने हज़ारीबाग जिले से बनाया गया था | इस जिले में केवल दो महत्वपूर्ण कोडरमा और झुमरी तिलैया शहर  है जो की समुद्री माइका संग्रह के लिए जाना जाता है और इसी लिए इसे अभरख नगरी भी कहा जाता है

यह जिला उत्तर में बिहार के नवादा जिले  से ,दक्षिण में झारखण्ड के हज़ारीबाग जिले से , पूरब में झारखण्ड के गिरिडीह जिले से और पश्चिम में बिहार के गया जिले से घिरा हुआ है |कोडरमा जिला छोटानागपुर पठार में स्थित है।

आकर्षण

झुमरी तिलैया, तिलैया बांध, उरवा  पर्यटक परिसर, धवाजधारी हिल (पहारी), सतगावां  पेट्रो जल प्रपात  है, संत परमहंस बाबा मकबरा, मकामारो हिल्स, शक्तिपीठ मां चंचला देवी।

कैसे पहुंचा जाये

कोडरमा शहर रांची और पटना को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर स्थित है| कलकत्ता और दिल्ली को जोड़ने वाली ग्रैंड कोर्ड रेल मार्ग पर कोडरमा रेलवे स्टेशन को भी जोडती है | ग्रैंड कोर्ड रेल मार्ग मुख्य रूप से झरिया और रानीगंज कोलफील्ड त्व्ररित सूप से जोड़ने के लिए बनायीं गयी थी

मुख्य पर्यटक स्थल :-

तिलैया डैम

तिलैया डैम दामोदर घटी निगम द्वारा निर्मित यह पहला बांध और हाइड्रो इलेक्ट्रिक पॉवर स्टेशन है जो की बराकर नदी पर बनाया गया है| यह बांध 1200 फीट लम्बा और 99 फीट उचा है जो की 36 वर्ग किमी के क्षेत्र में एक सुन्दर और आदर्श झील से घिरा हुआ है|इसके निर्माण का मुख्य उद्देश्य बाढ़ को नियंत्रित करना है और साथ ही यहाँ निर्मित 4 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है| इसका सुन्दर प्राकृतिक परिवेष  पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है| यह स्थान बरही से मुख्य सड़क के द्वारा जलाशयों और पहाडियों से हो के जाता है |

माँ चंचला देवी शक्ति पीठ

यह स्थान जिला मुख्यालय से लगभग 33 किलोमीटर दूर कोडरमा-गिरिडीह राजमार्ग पर स्थित है। माँ चंचला देवी जो की माँ दुर्गा का एक रूप है जिनका मंदिर उचे पहाड़ पर लगभग 400 फीट की उचाई पर स्थित एक गुफा में है जहा प्रवेश करना मुस्किल है है क्यौकी गुफा का मार्ग बहुत संकीर्ण है|यहाँ हर सप्ताह प्रत्येक मंगलवार और सनिवार को भक्त बड़ी संख्या में पहुचते है|यहाँ प्रसाद के रूप में अरवा चावल और मिश्री होता है और सिंदूर का प्रयोग निषेध है | यहाँ बड़ी संख्या में विवाह, मुंडन भी होता है|भक्तो को यहाँ से स्नान करने के बाद ही जाना होता है और जो इस अनुष्ठानो का उलंघन करते है उन्हें कीड़े काटने का दंड दिया जाता है|

घोड़ सिमर धाम

कोडरमा जिले से लगभग 70 किलोमीटर दूर सतगावां प्रखंड अंतर्गत घोडसीमर को देवघर धाम विशिष्ट पुरातात्विक सह धार्मिक स्थल है प्राकृतिक नजारो से सरोबोर देवघर धाम पहाड नदी तक फैला हुआ है यहां पर लगभग एक मीटर की गोलाइवाला चार फीट लंबा  शिवलिंग है।